वीनस प्रतिमाओं, देवी-मिथकों और X-गुणसूत्रीय चयन-स्वीप को समेकित करते हुए प्रारंभिक मानव संस्कृति में महिलाओं के संभावित नेतृत्व का पुनर्मूल्यांकन।
आद्य मातृसत्ता और चेतना का लैंगिक विकास


वीनस प्रतिमाओं, देवी-मिथकों और X-गुणसूत्रीय चयन-स्वीप को समेकित करते हुए प्रारंभिक मानव संस्कृति में महिलाओं के संभावित नेतृत्व का पुनर्मूल्यांकन।

क्या उद्भव-शैली के सृष्टि-मिथक पुरापाषाण काल तक पीछे जाते हैं? वंशवृक्षीय अनुसंधान, प्यूब्लो/एंडीयन सामग्री और पुरापाषाणकालीन ‘वीनस’ प्रतिमाशास्त्र का एक आलोचनात्मक संश्लेषण, जो स्त्रियों को विश्वोत्पत्ति की सक्रिय कर्त्रियों के रूप में केंद्र में रखता है।

इस विकासवादी परिकल्पना की पड़ताल करता है कि सामाजिक बुद्धिमत्ता और स्व-पालतूकरण के पक्ष में महिलाओं द्वारा संचालित चयन-दबावों ने महिलाओं को मानव-विकास के अग्रणी मोर्चे पर स्थापित किया।

‘स्त्री-नेतृत्व वाली ब्रह्मांडोत्पत्ति’ की परिभाषा प्रस्तुत करता है और तर्क देता है कि पुरापाषाण कला तथा अंतर-सांस्कृतिक मिथकीय प्रतिरूप एकरूपी महान माता के बजाय अनेक सक्रिय स्त्री-स्रष्टाओं की अवधारणा का समर्थन करते हैं, जिसके पक्ष में वंशवृक्षीय और पुरातात्त्विक साक्ष्य भी हैं।