ड्जैंग्गावुल, वावलाग बहनों और इंद्रधनुषी सर्प की ड्रीमिंग कथाएँ आत्म-सचेत, भाषा-प्रेरित संस्कृति की ओर प्रागैतिहासिक संक्रमण को किस प्रकार सांकेतिक रूप में अभिव्यक्त करती हैं।
ऑस्ट्रेलियाई ड्रीमिंग मिथक और चेतना का उदय


ड्जैंग्गावुल, वावलाग बहनों और इंद्रधनुषी सर्प की ड्रीमिंग कथाएँ आत्म-सचेत, भाषा-प्रेरित संस्कृति की ओर प्रागैतिहासिक संक्रमण को किस प्रकार सांकेतिक रूप में अभिव्यक्त करती हैं।

EToC उस विशिष्ट ऐतिहासिक और यांत्रिक ‘सॉफ़्टवेयर अद्यतन’ का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है, जिसकी डेनेट के आख्यानात्मक आत्म-सिद्धांत को आवश्यकता है, पर जिसे वह अपरिभाषित छोड़ देता है।

चेतना का सर्प-पंथ सैपिएंट पैराडॉक्स को नए परिप्रेक्ष्य में रखता है: व्यवहारगत आधुनिकता ~15 kya आत्मत्व के मीमेटिक—आनुवंशिक नहीं—प्रसार के माध्यम से उभरी।

डेनेट/जेन्स के पाठकों के लिए चेतना के ईव सिद्धांत का एक गहन विवेचन, जिसमें तर्क दिया गया है कि चेतना का ईव सिद्धांत वह ठोस जीन-संस्कृति उद्गम-कथा प्रस्तुत करता है, जिसे डेनेट का आख्यानात्मक आत्म-मॉडल अनुत्तरित छोड़ देता है।

विशेषज्ञों के लिए सुलभ द्वि-विरासत सिद्धांत का एक परिचय, जो यह तर्क प्रस्तुत करता है कि चेतना का ईव सिद्धांत इस बात का अधिक सशक्त जीन–संस्कृति विवरण है कि मनुष्य मनोवैज्ञानिक रूप से आधुनिक कैसे बने।

चेतना के सर्प पंथ ने सैपियन्ट विरोधाभास को पुनः परिभाषित किया: व्यवहारिक आधुनिकता ~15 हजार साल पहले आत्मता के मेमेटिक—न कि आनुवंशिक—प्रसार के माध्यम से उभरी।